✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

मेत्ता

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • आवाहन

    आवाहन

    लेख

    दुनिया ने अचानक एक बड़ा मोड़ लिया है और उत्क्रांति के नए चरण में प्रवेश किया है। अब तेजी से आ रहे बदलाव नाटकीय स्तर पर हैं—कल्पना से परे।

  • आस्था और क्षमा

    आस्था और क्षमा

    लेख

    पहले 'रहमत उत्सव' ने समाज के सामने साहस, असीम करुणा, बेमिसाल एकजुटता और अपनों को खोने के बाद भी दुश्मनों को माफ़ कर देने की कुछ ऐसी कहानियाँ रखीं, जो दिल को झकझोर देती हैं...

  • बेरहम दुनिया, क्रांतिकारी मार्ग

    बेरहम दुनिया, क्रांतिकारी मार्ग

    लेख

    हम एक बेहद परेशान और उथल-पुथल से भरे दौर से गुज़र रहे हैं। इस दुनिया में जो कुछ भी सबसे अनमोल था—जैसे इंसानियत, न्याय, मोहब्बत, हिम्मत, देखभाल और हमदर्दी—वह सब आज बुरी तरह बिखर चुका है...

  • शुरुवात कैसे करें - छठा कदम - भावना

    शुरुवात कैसे करें - छठा कदम - भावना

    लेख

    भावना' का अर्थ है—अच्छे गुण बढ़ाना, जैसे मेत्ता (सद्भावना), करुणा, शांति, एकाग्रता और अंतर्ज्ञान, जो हमारे भीतर की पुरानी, अकुशल प्रवृत्तियों को कम करते-करते अंततः उन्हें समाप्त तक कर देते हैं।

  • भावना

    भावना

    ग्रन्थ / पुण्य

    जो पुण्यक्रिया के तमाम आधार आपोआप (स्वर्ग में) उत्पन्न कराते हैं, वे ‘मेत्ता चेतोविमुक्ति’ के सोलहवें हिस्से के बराबर भी नहीं हैं। मेत्ता तमाम पुण्यों से आगे बढ़कर अधिक चमकती है, उजाला करती है, चकाचौंध करती है।

  • मरण

    मरण

    ग्रन्थ / पुण्य

    भंते, मैने अब तक भगवान के समक्ष यह नहीं सुना, यह नहीं सीखा कि कोई प्रज्ञावान उपासक, किसी बीमार, गंभीर रोग से पीड़ित प्रज्ञावान उपासक को कैसे उपदेश करें?

  • २१. ककचूपम सुत्त

    २१. ककचूपम सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    आलोचना कैसे झेलें? भगवान जीवंत और यादगार उपमाओं के साथ बताते हैं।

  • ३१. चूळगोसिङ्ग सुत्त

    ३१. चूळगोसिङ्ग सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    कलह के समय, भगवान उन तीन भिक्षुओं से मिलते हैं जो स्नेहपूर्वक वन में साधनारत हैं।

  • ४८. कोसम्बिय सुत्त

    ४८. कोसम्बिय सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    कौशाम्बी के झगड़ालू भिक्षुओं को भगवान स्नेहभाव और एकता का महत्व समझाते हैं।

  • क्षमा

    क्षमा

    देसना

    यदि आपका कोई बुरा करे, लेकिन आप माफ़ कर दे तो उसका बुरा-कर्म मिट नही जाता। इसलिए कुछ लोग मानते है कि बुद्ध की कर्म-शिक्षा में माफ़ी का कोई अस्तित्व नहीं; जो असंगत-सी लगती है। परंतु ऐसा नही है।