मेत्ता
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —


आस्था और क्षमा
लेखपहले 'रहमत उत्सव' ने समाज के सामने साहस, असीम करुणा, बेमिसाल एकजुटता और अपनों को खोने के बाद भी दुश्मनों को माफ़ कर देने की कुछ ऐसी कहानियाँ रखीं, जो दिल को झकझोर देती हैं...

बेरहम दुनिया, क्रांतिकारी मार्ग
लेखहम एक बेहद परेशान और उथल-पुथल से भरे दौर से गुज़र रहे हैं। इस दुनिया में जो कुछ भी सबसे अनमोल था—जैसे इंसानियत, न्याय, मोहब्बत, हिम्मत, देखभाल और हमदर्दी—वह सब आज बुरी तरह बिखर चुका है...

शुरुवात कैसे करें - छठा कदम - भावना
लेखभावना' का अर्थ है—अच्छे गुण बढ़ाना, जैसे मेत्ता (सद्भावना), करुणा, शांति, एकाग्रता और अंतर्ज्ञान, जो हमारे भीतर की पुरानी, अकुशल प्रवृत्तियों को कम करते-करते अंततः उन्हें समाप्त तक कर देते हैं।

भावना
ग्रन्थ / पुण्यजो पुण्यक्रिया के तमाम आधार आपोआप (स्वर्ग में) उत्पन्न कराते हैं, वे ‘मेत्ता चेतोविमुक्ति’ के सोलहवें हिस्से के बराबर भी नहीं हैं। मेत्ता तमाम पुण्यों से आगे बढ़कर अधिक चमकती है, उजाला करती है, चकाचौंध करती है।

मरण
ग्रन्थ / पुण्यभंते, मैने अब तक भगवान के समक्ष यह नहीं सुना, यह नहीं सीखा कि कोई प्रज्ञावान उपासक, किसी बीमार, गंभीर रोग से पीड़ित प्रज्ञावान उपासक को कैसे उपदेश करें?

२१. ककचूपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायआलोचना कैसे झेलें? भगवान जीवंत और यादगार उपमाओं के साथ बताते हैं।

३१. चूळगोसिङ्ग सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायकलह के समय, भगवान उन तीन भिक्षुओं से मिलते हैं जो स्नेहपूर्वक वन में साधनारत हैं।

४८. कोसम्बिय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायकौशाम्बी के झगड़ालू भिक्षुओं को भगवान स्नेहभाव और एकता का महत्व समझाते हैं।
