यक्ष
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

१८. जनवसभ सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायभगवान बुद्ध के एक पूर्वजन्म की प्रेरणादायी और रोमांचकारी कथा, जिसमें वे एक महान चक्रवर्ती सम्राट बने। सुदर्शन महाराज की महानता उनकी सहजता में घुल-मिलकर इस जातक कथा को अत्यंत रोचक और कभी न भूलनेवाली बनाती है।

२०. महासमय सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायभगवान बुद्ध का दर्शन लेने के लिए दूसरी दुनियाओं के अनेक देवतागण एकत्र हुए। तब, भगवान ने उनका वर्णन कर, भिक्षुओं का उनसे परिचय कराया।

३१. चूळगोसिङ्ग सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायकलह के समय, भगवान उन तीन भिक्षुओं से मिलते हैं जो स्नेहपूर्वक वन में साधनारत हैं।

३२. आटानाटियसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायदुनिया में अनेक तरह के अदृश्य सत्व हैं, और हर कोई हमारा हितकांक्षी नहीं है। कई सत्व हिंसक भी हैं। यह सूत्र रक्षामंत्र के तौर पर उनसे बचने का मार्ग बताता है।

शब्दावली - मूल अर्थ और संदर्भ
धम्म के तकनीकी शब्दों को उनके सही अर्थ और संदर्भ में समझना आवश्यक है, जिस संदर्भ में स्वयं भगवान बुद्ध उनका प्रयोग करते थे। इसी उद्देश्य से यह शब्दावली तैयार है।