विषय दर्शन
विज्ञान
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

३८. महातण्हासङ्खय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक भिक्षु अपने दृष्टिकोण पर अड़ा हुआ है। तब भगवान, संवादात्मक शैली में, प्रतीत्य समुत्पाद के सिद्धांत पर प्रतिप्रश्न करते हुए भिक्षुओं को गहरा अर्थ बताते हैं।

३८. महातण्हासङ्खय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक भिक्षु अपने दृष्टिकोण पर अड़ा हुआ है। तब भगवान, संवादात्मक शैली में, प्रतीत्य समुत्पाद के सिद्धांत पर प्रतिप्रश्न करते हुए भिक्षुओं को गहरा अर्थ बताते हैं।

४३. महावेदल्ल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ दो भिक्षुओं के सवाल-जवाब से धम्म के गहरे पहलू एक खिलते हुए फूल की तरह खुलते हैं।