विषय दर्शन
विपस्सना
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

११. ब्रह्मविहारादि
ग्रन्थ / पटिपदाध्येयकुशल सन्तपद-अभिलाषी को यह करना चाहिए—सक्षम, सीधा और स्पष्टवादी हो...

७३. महावच्छ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायवह संन्यासी अब अपनी शंका का अंतिम समाधान पूछता है और भिक्षुत्व स्वीकार करता है।