✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

श्रद्धा

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • अरिय सङ्घ १

    अरिय सङ्घ १

    लेख

    विचरण करों, भिक्षुओं—बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, इस दुनिया पर उपकार करते हुए, देव और मानव के कल्याण, हित और सुख के लिए!

  • अरिय सङ्घ २

    अरिय सङ्घ २

    लेख

    विचरण करों, भिक्षुओं—बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, इस दुनिया पर उपकार करते हुए, देव और मानव के कल्याण, हित और सुख के लिए!

  • त्रिशरण क्या है?

    त्रिशरण क्या है?

    लेख

    शरण जाने का अर्थ है—यह स्वीकार करना कि 'मैं अपने विकारों से हार रहा हूँ, और अब मुझे एक ऐसे मार्गदर्शक की आवश्यकता है जिसने इन शत्रुओं को परास्त किया हो।'

  • गुरु

    गुरु

    लेख

    आज अध्यात्म भी एक प्रतिस्पर्धा बन चुका है। चमत्कारी बाबाओं और आकर्षक दावों की भीड़ में विवेक खो जाना सहज है, जबकि सच्चे कल्याणमित्र प्रायः शांत और अल्पप्रचारित होते हैं।

  • बुद्ध धर्म ही क्यों?

    बुद्ध धर्म ही क्यों?

    लेख

    बुद्ध का मार्ग भला क्यों चुना जाना चाहिए? और यह अन्य आध्यात्मिक पथों से किस प्रकार भिन्न और श्रेष्ठ है?

  • शुरुवात कैसे करें - पहला कदम - त्रिशरण

    शुरुवात कैसे करें - पहला कदम - त्रिशरण

    लेख

    जब किसी को बुद्ध पर विश्वास होने लगे, तो शुरुवाती पहला कदम क्या होता है?

  • धम्म का द्वार खोलना

    धम्म का द्वार खोलना

    लेख

    अगर आपका जन्म किसी एशियाई बौद्ध परिवार में हुआ है, तो आपके माता-पिता बौद्ध धर्म के बारे में आपको सबसे पहले कोई गूढ़ दार्शनिक सिद्धांत नहीं सिखाएंगे। वे आपको सिखाएंगे आदर करने का एक सरल सा तरीका...

  • धम्म के दो रूप

    धम्म के दो रूप

    लेख

    पहली बार सामना होने पर, बौद्ध धर्म हमारे सामने एक विरोधाभास के रूप में आता है। हमें जल्द ही पता चलता है कि इसका एक दूसरा पहलू भी है, जो हमारी तर्कसंगत पूर्व-मान्यताओं के बिल्कुल विपरीत लगता है...

  • बुद्ध की शरण

    बुद्ध की शरण

    लेख

    बुद्ध की शरण में जाने का यह कार्य हमारे जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए इस महत्वपूर्ण कदम के अर्थ और महत्व पर बार-बार रुककर विचार करना ज़रूरी है...

  • बोधि में श्रद्धा

    बोधि में श्रद्धा

    लेख

    बुद्ध ने कभी किसी पर आँख मूँदकर विश्वास करने या श्रद्धा रखने का कोई अंधा दबाव नहीं बनाया। आज के दौर में, जहाँ संसार के बहुसंख्यक और प्रभुत्वशाली धर्म बिना किसी तर्क के पूर्ण आत्मसमर्पण और अंधश्रद्धा की मांग करते हैं, वहाँ बुद्ध का यह प्रगतिशील नज़रिया सबसे बड़ी खूबी बनकर उभरता है...

  • विचिकिच्छा - उलझन और उसका त्याग

    विचिकिच्छा - उलझन और उसका त्याग

    लेख

    उलझन या शंका बाहरी जानकारी की कमी से नहीं, बल्कि भीतर की अस्पष्टता से जन्म लेती है। जब चित्त का अपना कोई ठोस आधार नहीं होता, तो वह मानसिक गुलामी, अंधविश्वास और अनिश्चितता के रेगिस्तान में भटकने लगता है।

  • विपश्यना ध्यान की दो शैलियाँ

    विपश्यना ध्यान की दो शैलियाँ

    लेख

    आज 'विपश्यना ध्यान' का अभ्यास वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो गया है... अब इसे बौद्ध मार्ग के एक अभिन्न अंग के रूप में सिखाने के बजाय, अक्सर एक धर्मनिरपेक्ष अनुशासन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है...

  • हृदय और भावनाओं का मार्ग

    हृदय और भावनाओं का मार्ग

    लेख

    अक्सर यह माना जाता है कि बौद्ध धर्म भावनाओं का नहीं, बल्कि पूरी तरह से बुद्धि और तार्किकता का मार्ग है। लेकिन, यदि हम इस परंपरा की गहराई में जाएँ, तो पाएंगे कि शुरुआत से ही यह कुछ बेहद गहरी और बुनियादी भावनाओं से ही संचालित रही है...

  • हृदय की पवित्रता

    हृदय की पवित्रता

    लेख

    जब मैं अपने गुरु, अजान फुआंग के पास नया-नया आया था, तो शुरुआती हफ़्तों में ही मुझे यह अहसास होने लगा कि उनके पास कुछ अलौकिक शक्तियां थीं...

  • अपार पुण्य

    अपार पुण्य

    ग्रन्थ / पुण्य

    भगवान ने कहा, अपार पुण्य, अपार कुशलता, सुख आहार चार होते हैं। कौन से चार?

  • १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

  • २७. चूळहत्थिपदोपम सुत्त

    २७. चूळहत्थिपदोपम सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    क्या हमें श्रद्धा से तुरंत मान लेना चाहिए? भगवान यहाँ उपमा देकर हमें सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

  • २८. सम्पसादनीयसुत्त

    २८. सम्पसादनीयसुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    परिनिर्वाण लेने से पूर्व, आयुष्मान सारिपुत्त आकर भगवान से मुलाक़ात करते है, और महान शास्ता के लिए भाव-विभोर बातें कहते हैं।

  • २९. पासादिकसुत्त

    २९. पासादिकसुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    महावीर जैन के निधन होने पर उनके संघ में ‘कत्लेआम’ मचा। उसे सुनकर, बुद्ध अपने संघ में स्थिरता और प्रौढ़ता का भाव व्यक्त करते है। और, भिक्षुओं को संगीति के लिए प्रेरित भी करते है।

  • ४७. वीमंसक सुत्त

    ४७. वीमंसक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    साधक को गुरु की कड़ी छानबीन करनी चाहिए और श्रद्धा रखने से पहले आँख और कान खुले रखने चाहिए। भगवान बताते हैं कि यह कैसे करना है।

  • ५१. कन्दरक सुत्त

    ५१. कन्दरक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    'पशुओं का स्वभाव सीधा होता है, जबकि मानव स्वभाव का कोई भरोसा नहीं!' इस बात पर भगवान चार प्रकार के व्यक्तियों का वर्णन करते हैं।

  • ६०. अपण्णक सुत्त

    ६०. अपण्णक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    यदि आपको किसी पर श्रद्धा न हो तो तर्क का आधार लेकर सुरक्षित दाँव लगाना चाहिए।

  • ६६. लटुकिकोपम सुत्त

    ६६. लटुकिकोपम सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान का उपकार अनुभव करने वाले भिक्षु को भगवान बंधन तोड़ने और उपाधियों से परे जाने का धम्म सिखाते हैं।

  • ७३. महावच्छ सुत्त

    ७३. महावच्छ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    वह संन्यासी अब अपनी शंका का अंतिम समाधान पूछता है और भिक्षुत्व स्वीकार करता है।

  • ७७. महासकुलुदायि सुत्त

    ७७. महासकुलुदायि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    विभिन्न पंथों के बीच आपसी संवाद में सभी गुरुओं और उनके शिष्यों के असली चेहरे उजागर होते हैं। भगवान बुद्ध के भी।

  • ८२. रट्ठपाल सुत्त

    ८२. रट्ठपाल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक नवयुवक, प्रव्रज्या की अनुमति पाने के लिए माता-पिता से संघर्ष करता है, और अरहंत बनकर लौटकर धूम मचाता है।

  • ८६. अङ्गुलिमाल सुत्त

    ८६. अङ्गुलिमाल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    बौद्ध परम्परा की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक—कुख्यात हत्यारे अँगुलिमाल की रोचक कथा।

  • ८९. धम्मचेतिय सुत्त

    ८९. धम्मचेतिय सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान की याद आने पर, राजा प्रसेनजित जाकर भगवान के चरणों को चूमता है और इसके दस कारण बताता है।

  • ९१. ब्रह्मायु सुत्त

    ९१. ब्रह्मायु सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    १२० वर्ष का वृद्ध ब्राह्मण अपने शिष्य को भगवान के लक्षण देखने भेजता है, और गहन रिपोर्ट पाकर परम-समर्पण करता है।

  • ९२. सेल सुत्त

    ९२. सेल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक जटाधारी, जो ब्राह्मण गुरु के प्रति समर्पित है, उसके यहाँ भोजन निमंत्रण पर भगवान उसी गुरु और उसके शिष्यों को भिक्षु बनाकर वहाँ जाते हैं।

  • ९५. चङ्की सुत्त

    ९५. चङ्की सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    जम्बुद्वीप के प्रमुख ब्राह्मणों में गिने जाने वाले चङ्की के समक्ष भगवान ब्राह्मणों के सभी दावों को एक-एक कर ध्वस्त करते हैं।

  • १०३. किन्ति सुत्त

    १०३. किन्ति सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान भिक्षुओं को आपसी असहमति या टकराव होने पर उससे निपटने के सही तरीक़े बताते हैं।

  • १०८. गोपकमोग्गल्लान सुत्त

    १०८. गोपकमोग्गल्लान सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान के परिनिर्वाण के बाद भिक्षुसंघ कैसे चलता है और उसका नेतृत्व कौन करता है?—इस पर आनन्द भन्ते के उत्तर।

  • ११८. आनापानस्सति सुत्त

    ११८. आनापानस्सति सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान सबकी पसंदीदा आनापान-स्मृति सिखाते हैं, दिखाते हुए कि वह कैसे चारों स्मृतिप्रस्थान, सातों संबोध्यंग, तथा विद्या-विमुक्ति को पूर्ण करती है।

  • १२३. अच्छरियब्भुत सुत्त

    १२३. अच्छरियब्भुत सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    क्या आप जानते हैं बोधिसत्व के जन्म के समय कौन-से अद्भुत चमत्कार हुए थे? आनन्द भन्ते उनका मनमोहक वर्णन करते हैं।