✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

संघ

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • अरिय सङ्घ १

    अरिय सङ्घ १

    लेख

    विचरण करों, भिक्षुओं—बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, इस दुनिया पर उपकार करते हुए, देव और मानव के कल्याण, हित और सुख के लिए!

  • अरिय सङ्घ २

    अरिय सङ्घ २

    लेख

    विचरण करों, भिक्षुओं—बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए, इस दुनिया पर उपकार करते हुए, देव और मानव के कल्याण, हित और सुख के लिए!

  • अर्हंत बनाम बोधिसत्व

    अर्हंत बनाम बोधिसत्व

    लेख

    आज १५०० साल बाद, हमारे पास 'बुद्ध के नाम पर खिचड़ी पक चुकी है। थेरवाद, महायान, वज्रयान—सब दावा करते हैं कि वे सही हैं। एक आम साधक कैसे पहचाने कि शुद्ध घी कौन सा है और डालडा कौन सा?

  • त्रिशरण क्या है?

    त्रिशरण क्या है?

    लेख

    शरण जाने का अर्थ है—यह स्वीकार करना कि 'मैं अपने विकारों से हार रहा हूँ, और अब मुझे एक ऐसे मार्गदर्शक की आवश्यकता है जिसने इन शत्रुओं को परास्त किया हो।'

  • शुरुवात कैसे करें - पहला कदम - त्रिशरण

    शुरुवात कैसे करें - पहला कदम - त्रिशरण

    लेख

    जब किसी को बुद्ध पर विश्वास होने लगे, तो शुरुवाती पहला कदम क्या होता है?

  • ७३. महावच्छ सुत्त

    ७३. महावच्छ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    वह संन्यासी अब अपनी शंका का अंतिम समाधान पूछता है और भिक्षुत्व स्वीकार करता है।

  • १०४. सामगाम सुत्त

    १०४. सामगाम सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    निगण्ठ नाटपुत्त (महावीर जैन) के निधन पर जैन समुदाय में भारी कलह हुआ। इसी पर भगवान ने आनन्द को संघ में विवाद निपटाने के तरीके बताए।

  • १०८. गोपकमोग्गल्लान सुत्त

    १०८. गोपकमोग्गल्लान सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान के परिनिर्वाण के बाद भिक्षुसंघ कैसे चलता है और उसका नेतृत्व कौन करता है?—इस पर आनन्द भन्ते के उत्तर।