विषय दर्शन
संबोध्यङ्ग
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

९. सब्बासवादि
ग्रन्थ / पटिपदाभिक्षुओं, जो स्वयं जानता है, देखता है—मैं कहता हूँ उसके बहाव थमते है। जो स्वयं नहीं जानता, नहीं देखता, उसके बहाव नहीं थमते। क्या स्वयं जानता है, देखता है?


१६. महापरिनिब्बान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकाययह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

२८. सम्पसादनीयसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायपरिनिर्वाण लेने से पूर्व, आयुष्मान सारिपुत्त आकर भगवान से मुलाक़ात करते है, और महान शास्ता के लिए भाव-विभोर बातें कहते हैं।