संवेग
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

सम्बोधि क्या है?
लेखदुनिया के अधिकतर धर्म 'विश्वास' पर टिके हैं। वे कहते हैं—'इस किताब पर भरोसा करो,' या 'ईश्वर पर भरोसा करो।' लेकिन बुद्ध का धम्म 'खोज' पर टिका है।

बौद्ध स्थल - संवेग स्थल
लेखइन स्थलों पर पहुँचकर बुद्ध का अस्तित्व केवल एक सुनी-सुनाई कथा नहीं रह जाता—वह स्पंदित होने लगता है, सजीव हो उठता है, और संस्पर्श होते अनुभूति में बदल जाता है। इन स्थलों के वातावरण में ही वह प्रशांति और ऊर्जा महसूस होती है, जो संसार के परे हो। ऐसा लगता है जैसे बुद्ध और उनके अरहंत शिष्य आज भी उसी धरती …


सिद्धार्थ गोतम की गृहस्थी और संवेग
लेखआइए, अब उस राजमहल के भीतर चलते हैं जहाँ राजकुमार सिद्धार्थ का युवावन खिल रहा है—सुखों के सागर में, लेकिन एक अजीब सी प्यास के साथ।


१५. संवेग ओवाद
ग्रन्थ / पटिपदाभिक्षुओं, दस धर्म होते है, जिनके प्रति प्रवज्यितों को हमेशा चिंतनशील रहना चाहिए। कौन से दस?

८२. रट्ठपाल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक नवयुवक, प्रव्रज्या की अनुमति पाने के लिए माता-पिता से संघर्ष करता है, और अरहंत बनकर लौटकर धूम मचाता है।

८७. पियजातिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायप्रियजनों से आखिर क्या मिलता है? भगवान के शब्द सहज बुद्धि के विपरीत जाते हैं, और समाज में हंगामा मचाते हैं।