✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

संवेग

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • सम्बोधि क्या है?

    सम्बोधि क्या है?

    लेख

    दुनिया के अधिकतर धर्म 'विश्वास' पर टिके हैं। वे कहते हैं—'इस किताब पर भरोसा करो,' या 'ईश्वर पर भरोसा करो।' लेकिन बुद्ध का धम्म 'खोज' पर टिका है।

  • बौद्ध स्थल - संवेग स्थल

    बौद्ध स्थल - संवेग स्थल

    लेख

    इन स्थलों पर पहुँचकर बुद्ध का अस्तित्व केवल एक सुनी-सुनाई कथा नहीं रह जाता—वह स्पंदित होने लगता है, सजीव हो उठता है, और संस्पर्श होते अनुभूति में बदल जाता है। इन स्थलों के वातावरण में ही वह प्रशांति और ऊर्जा महसूस होती है, जो संसार के परे हो। ऐसा लगता है जैसे बुद्ध और उनके अरहंत शिष्य आज भी उसी धरती …

  • आवाहन

    आवाहन

    लेख

    दुनिया ने अचानक एक बड़ा मोड़ लिया है और उत्क्रांति के नए चरण में प्रवेश किया है। अब तेजी से आ रहे बदलाव नाटकीय स्तर पर हैं—कल्पना से परे।

  • खतरा तो आम बात है

    खतरा तो आम बात है

    लेख

    थेरवाद परंपरा के बौद्ध विहारों में एक छोटा सा पाठ रोज़ दोहराया जाता है, जिसका एक हिस्सा कहता है: मेरा बूढ़ा होना तय है... मेरा बीमार पड़ना तय है... मेरी मौत होना तय है...

  • जलेबी के बदले सोना

    जलेबी के बदले सोना

    लेख

    हम सभी सुख की तलाश में हैं। राजा हो या भिखारी, चोर हो या संत—हर कोई दुख से छुटकारा पाना चाहता है और सुख पाना चाहता है। इस सार्वभौमिक सच्चाई को समझते हुए, बौद्ध दर्शन सुख की इस खोज पर दो शर्तें रखता है...

  • बुद्ध के आखिरी शब्द

    बुद्ध के आखिरी शब्द

    लेख

    जिस रात बुद्ध हमेशा के लिए इस संसार के अंतिम बंधनों से आज़ाद (महापरिनिब्बान) होने वाले थे, वे दो खिलते हुए पेड़ों के नीचे एक करवट लेटे हुए थे। वहाँ उन्होंने अपने शिष्यों को आखिरी उपदेश दिया। उनके जीवन का अंतिम वाक्य था—अप्पमादेन सम्पादेथ...

  • सिद्धार्थ गोतम की गृहस्थी और संवेग

    सिद्धार्थ गोतम की गृहस्थी और संवेग

    लेख

    आइए, अब उस राजमहल के भीतर चलते हैं जहाँ राजकुमार सिद्धार्थ का युवावन खिल रहा है—सुखों के सागर में, लेकिन एक अजीब सी प्यास के साथ।

  • हृदय और भावनाओं का मार्ग

    हृदय और भावनाओं का मार्ग

    लेख

    अक्सर यह माना जाता है कि बौद्ध धर्म भावनाओं का नहीं, बल्कि पूरी तरह से बुद्धि और तार्किकता का मार्ग है। लेकिन, यदि हम इस परंपरा की गहराई में जाएँ, तो पाएंगे कि शुरुआत से ही यह कुछ बेहद गहरी और बुनियादी भावनाओं से ही संचालित रही है...

  • १. संवेग

    १. संवेग

    ग्रन्थ / पटिपदा

    मैं बताता हूँ कैसे, जागा संवेग मुझे। छटपटाती दिखी जनता, गड्ढे में मछलियों जैसे...

  • १५. संवेग ओवाद

    १५. संवेग ओवाद

    ग्रन्थ / पटिपदा

    भिक्षुओं, दस धर्म होते है, जिनके प्रति प्रवज्यितों को हमेशा चिंतनशील रहना चाहिए। कौन से दस?

  • ८२. रट्ठपाल सुत्त

    ८२. रट्ठपाल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक नवयुवक, प्रव्रज्या की अनुमति पाने के लिए माता-पिता से संघर्ष करता है, और अरहंत बनकर लौटकर धूम मचाता है।

  • ८७. पियजातिक सुत्त

    ८७. पियजातिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    प्रियजनों से आखिर क्या मिलता है? भगवान के शब्द सहज बुद्धि के विपरीत जाते हैं, और समाज में हंगामा मचाते हैं।

  • शब्दावली - मूल अर्थ और संदर्भ

    शब्दावली - मूल अर्थ और संदर्भ

    धम्म के तकनीकी शब्दों को उनके सही अर्थ और संदर्भ में समझना आवश्यक है, जिस संदर्भ में स्वयं भगवान बुद्ध उनका प्रयोग करते थे। इसी उद्देश्य से यह शब्दावली तैयार है।