सत्पुरुष
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

आवाहन
लेखदुनिया ने अचानक एक बड़ा मोड़ लिया है और उत्क्रांति के नए चरण में प्रवेश किया है। अब तेजी से आ रहे बदलाव नाटकीय स्तर पर हैं—कल्पना से परे।

ज्ञानियों की संगति
लेखपहले ही गाथा में बुद्ध बताते हैं कि सबसे बड़ा मंगल मूर्खों से दूर रहने और ज्ञानियों की संगति करने में है (असेवना च बालानं, पण्डितानं च सेवना)...


१५. संवेग ओवाद
ग्रन्थ / पटिपदाभिक्षुओं, दस धर्म होते है, जिनके प्रति प्रवज्यितों को हमेशा चिंतनशील रहना चाहिए। कौन से दस?

९५. चङ्की सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायजम्बुद्वीप के प्रमुख ब्राह्मणों में गिने जाने वाले चङ्की के समक्ष भगवान ब्राह्मणों के सभी दावों को एक-एक कर ध्वस्त करते हैं।

११०. चूळपुण्णम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायपूर्णिमा की रात खुले आकाश के नीचे, भगवान स्वयं रोमहर्षक अवसर को भाँपकर, सत्पुरुष और असत्पुरुष की व्याख्या करते हैं।

११३. सप्पुरिस सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान यहाँ विभिन्न परिस्थितियों के माध्यम से असत्पुरुष भिक्षु और सत्पुरुष भिक्षु के बीच का अंतर स्पष्ट करते हैं।