विषय दर्शन
समथ
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —


११. ब्रह्मविहारादि
ग्रन्थ / पटिपदाध्येयकुशल सन्तपद-अभिलाषी को यह करना चाहिए—सक्षम, सीधा और स्पष्टवादी हो...

६. आकङ्खेय्य सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभिक्षु की आकांक्षा लौकिक हो या अलौकिक, भगवान उन्हें पूरा करने का मार्ग बताते हैं।

७३. महावच्छ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायवह संन्यासी अब अपनी शंका का अंतिम समाधान पूछता है और भिक्षुत्व स्वीकार करता है।

शब्दावली - मूल अर्थ और संदर्भ
धम्म के तकनीकी शब्दों को उनके सही अर्थ और संदर्भ में समझना आवश्यक है, जिस संदर्भ में स्वयं भगवान बुद्ध उनका प्रयोग करते थे। इसी उद्देश्य से यह शब्दावली तैयार है।

समथ ध्यान-साधना
देसनाआज मैं आपके साथ कुछ कहानियाँ, कुछ किस्से और कुछ हल्के-फुल्के मज़ाक साझा करूँगा ताकि हम खुद समझ सकें कि जीवन का असली अर्थ क्या है...