विषय दर्शन
सम्यक-दृष्टि
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

प्राथमिक अंतर्ज्ञान
ग्रन्थ / पुण्यऐसा होता है कि दुःख से हारा, चित्त से बेकाबू, एक व्यक्ति—अफ़सोस करता है, ढ़ीला पड़ता है, विलाप करता है, छाती पीटता है, बावला हो जाता है। किंतु दुःख से हारा, चित्त से बेकाबू, दूसरा व्यक्ति—बाहर ख़ोज करने निकल पड़ता है। सोचते हुए, ‘कौन इस दुःख को ख़त्म करने के एक-दो उपाय जानता है?

९. सम्मादिट्ठि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायसारिपुत्त भन्ते सम्यक-दृष्टि को अनोखे अंदाज में, गहरे प्रतीत्य समुत्पाद के आधार पर परिभाषित करते हैं।