✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

सम-विसम

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • विषम के बीच सम होकर चलना

    विषम के बीच सम होकर चलना

    लेख

    बुद्ध अक्सर दुनिया के जीवन को एक ऐसे ऊबड़-खाबड़ या विषम रास्ते के रूप में बताते हैं, जो हमें लगातार समभाव (संतुलन) से चलने की चुनौती देता है...

  • ४१. सालेय्यक सुत्त

    ४१. सालेय्यक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान साल गाँव के लोगों को ‘सम’ और ‘विषम’ आचरण के माध्यम से सद्गति और दुर्गति के कारणों को स्पष्ट करते हैं।

  • ४२. वेरञ्जक सुत्त

    ४२. वेरञ्जक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान गाँव के लोगों को ‘सम’ और ‘विषम’ आचरण के माध्यम से सद्गति और दुर्गति के कारणों को स्पष्ट करते हैं।

  • शब्दावली - मूल अर्थ और संदर्भ

    शब्दावली - मूल अर्थ और संदर्भ

    धम्म के तकनीकी शब्दों को उनके सही अर्थ और संदर्भ में समझना आवश्यक है, जिस संदर्भ में स्वयं भगवान बुद्ध उनका प्रयोग करते थे। इसी उद्देश्य से यह शब्दावली तैयार है।