✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
उपमा दर्शन

अदृश्य महल की सीढ़ी

— इस उपमा से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ९. पोट्ठपादसुत्तं

    ९. पोट्ठपादसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक घुमक्कड़ संन्यासी को भगवान संज्ञाओं की गहन अवस्थाओं के बारे में बताते हैं कि किस तरह वे गहरी ध्यान-अवस्थाओं से उत्पन्न होते हैं।

  • १३. तेविज्जसुत्तं

    १३. तेविज्जसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    कुछ सच्चे त्रिवेदी ब्राह्मण युवक ब्रह्मा के साथ समागम करने के मार्ग पर उलझन में हैं। किन्तु वे भाग्यशाली हैं, क्योंकि भगवान पास ही रहते हैं।