उपमा दर्शन
लकड़ी को जलाना
— इस उपमा से संबंधित संपूर्ण संकलन —

३६. महासच्चक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायप्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, इस बार अकेले में भगवान से वाद-विवाद करता है।

८५. बोधिराजकुमार सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायराजकुमार मानता है कि परमसुख कठिन तप से मिलता है, सुखद मार्ग से नहीं! इसी पर भगवान का उत्तर।

९०. कण्णकत्थल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायराजा प्रसेनजित, भगवान की ‘सर्वज्ञ-सर्वदर्शी’ बात की अफवाह सुनकर, सत्य जानने के लिए स्वयं भगवान के पास पहुँचता है।

९६. एसुकारी सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक ब्राह्मण भगवान से ब्राह्मण-व्यवस्था पर राय माँगता है, और भगवान खुलकर जवाब देते हैं।

१००. सङ्गारव सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक ब्राह्मण स्त्री के भगवान को याद करते ही चिढ़ा युवा ब्राह्मण, भगवान से मिलकर स्वयं उपासक बन जाता है।

११९. कायगतासति सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान कायागत-स्मृति को अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली ढंग से, अनेक सटीक उपमाओं के सहारे प्रस्तुत करते हैं।