सारकाष्ठ
— इस उपमा से संबंधित संपूर्ण संकलन —

बोधि में श्रद्धा
लेखबुद्ध ने कभी किसी पर आँख मूँदकर विश्वास करने या श्रद्धा रखने का कोई अंधा दबाव नहीं बनाया। आज के दौर में, जहाँ संसार के बहुसंख्यक और प्रभुत्वशाली धर्म बिना किसी तर्क के पूर्ण आत्मसमर्पण और अंधश्रद्धा की मांग करते हैं, वहाँ बुद्ध का यह प्रगतिशील नज़रिया सबसे बड़ी खूबी बनकर उभरता है...

१८. मधुपिण्डिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान के मुख से निकला 'प्रपंच' पर एक अत्यंत सारगर्भित और संक्षिप्त धम्म। लेकिन उसका अर्थ कौन बताए?

२९. महासारोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान ब्रह्मचर्य का सार बताते हैं, साथ ही उसके बाहरी छिलकों को भी उजागर करते हैं।

३०. चूळसारोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययह पिछले सूत्र की तरह ही ब्रह्मचर्य का सार बताता है, लेकिन अंतिम भाग में मिलावट नजर आती है।

३५. चूळसच्चक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक प्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज 'सच्चक', भगवान से सरेआम वाद-विवाद में भिड़ता है।

६४. महामालुक्य सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान निचली पाँच बेड़ियों को तोड़कर अनागामी अवस्था पाने का मार्ग उजागर करते हैं?

७२. अग्गिवच्छ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायवह संन्यासी अब भगवान से दुनिया की दस प्रमुख दार्शनिक मान्यताओं के बारे में प्रश्न करता है।

१३३. महाकच्चानभद्देकरत्त सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायमहाकच्चान भन्ते अपने अनूठे अंदाज में ‘भद्देकरत्त’ कविता के गहरे अर्थों को भिक्षुओं के सामने खोलते हैं।